अच्छा नहीं था

फ़ालतू बातों में कुछ रख्खा नहीं था,
आप जो कहते थे वो अच्छा नहीं था,

तंज,दूरी और फ़क़त लानत,मलामत,
एक मुहब्बत के अलावा क्या नहीं था ?

कितनी ज़्यादः कोशिशें कीं सीखने की,
क्या करें हमको ही कुछ आता नहीं था,

जब भी लाया आपका पैगाम क़ासिद,
डर गए बस हमने वो खोला नहीं था,

इक वफ़ा ही आपकी फितरत नहीं थी,
सब समझता था ये दिल बच्चा नहीं था,

हम हमेशा चुप रहे कुछ आदतन ही,
बोल सकते थे मगर चाहा नहीं था .......
#उर्मिलामाधव...
20.8.2014...

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