प्रज्वलित करो
अबा भी तार-तार हो,
फ़लक़ भी शोलाबार हो की तर्ज़ पर---
जब ह्रदय विदीर्ण हो,
स्वप्न जीर्ण-शीर्ण हो,
मार्ग भी संकीर्ण हो,
हारना नहीं पथिक,
उठ खड़े हो वेग से,
जो करो,त्वरित करो,
अंधकार के समक्ष
दीप प्रज्वलित करो...
उर्मिला माधव...
9.10.2016
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