सर लिया
जो उसे करना था उसने कर लिया,
मैंने बस इलज़ाम अपने सर लिया,
फासले दिल में मुक़म्मल हो गए,
और दामन इक धुंए से भर लिया,
मुतमईँ कोई हो गया उससे बहुत,
मैंने हिस्से में महज़ एक डर लिया,
सोचती रहती हूँ ......अब तन्हाई में,
इस क़दर क्यों फैसला बदतर लिया,
गुफ्तगू का वक़्त भी आया बहुत,
मैंने मौजू,जान कर, दीगर लिया...
खुश रहा वो भी मुझे कम आंक कर,
दिल मेंरा उसपे फ़क़त हंस भर लिया...
उर्मिला माधव...
31.10.2016
Comments
Post a Comment