करते रहो

ख़ुद सवाल-ओ-जवाब करते रहो,
अपने दिल से हिसाब करते रहो...

क्यूँ ये अरमान यूँ ही मर जाए,
तलब-ए-आफ़ताब करते रहो,

चांदनी हो या चाँद हो ख़ुद ही,
तुम तो नीयत खराब करते रहो,

चाहे तरज़ीह कोई दे या नहीं,
ख़ुद को यूँ ही ,सराब करते रहो,

जब तलक जिस्म टूट कर न गिरे,
ज़िंदगी .....बेनक़ाब करते रहो,
उर्मिला माधव...
24.10.2016

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge