भीड़ नहीं हो -फ्री वर्स
प्रियवर---
तुम भीड़ नहीं हो
भीड़ में कुछ आँखें बहुत चुभती हैं मुझे
तुम जानते हो क्या कहती हूँ मैं
भीड़ की आँखों की चुभन सालती है मुझे
तुम जानते हो क्या कहती हूँ मैं
तुम्हारा भीड़ से बचे रहना बहुत ज़रूरी है
खो जाओगे तुम, ऐसा नहीं है
तुम्हें भीड़ पसंद जो नहीं
तुम जानते हो क्या कहती हूँ मैं
ये अच्छा है,तुम सहल नहीं हो,
वरना किसीसे भी हल हो जाते,
ऊपर से कुछ भी हो सकते हो
पर तुमको हल करना सहल नहीं
तुम जानते हो क्या कहती हूँ मैं
मैंने जानी है तुम्हारी दुनियां
भीड़ क्या जाने तुम सहल नहीं हो
बीते हुए पल नहीं हो
तुम तत्काल हो,यहीं हो
तुम जानते हो क्या कहती हूँ मैं
ऊपरी आवरण तुम्हें
आकर्षित कर सकते हैं कुछ देर को
स्थायित्व नहीं पा सकती
भीड़ तुम्हारी आँखों में
क्योंकि तुम सहल नहीं हो
तुम जानते ही हो क्या कहती हूँ मैं
प्रियवर...
#उर्मिलामाधव
13.10.2015..
Comments
Post a Comment