कहानी-- तनारीरी

क्या ये दिन भर,तनारीरी लगाए रखती हो पढ़ाई में जी क्यूँ नहीं लगाती ये सब क्या काम आएगा,क्या तुमको कहीं मुजरा करना है जो  दिन भर थेई-थेई-थेई त त ता करती रहती हो,नहीं तो तबला पीटती रहती हो,इतना कहकर शर्मीला के भाई ने बहुत जोर से एक थप्पड़ उसके मुंह पर, रसीद कर दिया,कलाकार मन,बुरी तरह टूट गया,आंसू रुकने का नाम ही न लेते थे,ख़ैर अम्मा आईं और भाई के फेवर में समझाने लगीं,वो ठीक ही कहता है,तुम्हारे पिता नहीं हैं,किस-किस को जवाब देते फिरेंगे,अपनी बेटी को स्टेज पर चढ़ने ही क्यों देते हैं,
                 उसका बाल मन कुछ भी समझ नहीं पाया वो सोच रही थी,आख़िर इसमें बुरा क्या है और किसीकी जवाब देही भी क्यों है? उस दिन शर्मिला ने खाना नहीं खाया और वहीं ज़मीन पर पड़ी-पड़ी सो गई..
                कुछ देर में बहन ने उठाया,चल बिस्तर पर सोजा और भूख लगी हो तो खाना खाले, शर्मिला ने कुछ नहीं खाया और कहा भी कुछ नहीं,चुपचाप जाकर सो गई लेकिन उसको समझ में आ गया था के ये सफ़र आसान नहीं......
क्रमशः
उर्मिला माधव,
5.10 2017

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