जल्दी बहुत थी
कहीं भी समय से ....पहुँच ही न पाई,
समय को गुज़रने की जल्दी बहोत थी
कभी राह में,कोई तक़रार हो ली,
महज़ बे मआनी सी गुफ़्तार हो ली,
उसी मसअले में गिरफ़्तार हो ली,
तो मैं अपनी जानिब से चलती बहोत थी,
समय को गुज़रने की जल्दी बहोत थी,
उर्मिला माधव,
19.10.2017
Comments
Post a Comment