रोया नहीं
ग़ज़ल...
तू मुहब्बत में कभी रोया नहीं,
तूने शायद आईना देखा नहीं,
वक़्त के चेहरे की देखीं झुर्रियां,
क्या दरूँ था ये कभी सोचा नहीं,
उम्र भर तड़पे ये तनहा ज़िन्दगी,
तूने शायद ऐसा कुछ खोया नहीं....
दास्तां कहता है आधी रात की,
पूछ उससे जो कभी सोया नहीं,
आँख से टपका लहू,चस्पां रहा,
दाग़ फिर दिल का कभी धोया नहीं..
#उर्मिलामाधव...
30.7.2015...
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