यारो
जितनी निभती हो उसे दिल से निभालो यारो,
वरना कुछ दोस्त नए फिर से बनालो यारो...
दोस्ती खेल नहीं इसकी अदा सबको खबर,
अपनी बाज़ी को ज़रा ढंग से बिछा लो यारो,
आग से आग सुलगती है,कभी बुझती नहीं,
ग़म के शोलों की दवा ग़म न बनालो यारो,
दिल के हालात को महदूद नहीं रखना बस,
हम भी तो हैं न, चलो हमको सुनालो यारो,
कुछ घने दश्त हैं,छाले हैं अजब दुनियां है
जिसका अंदाज़ नहीं,उसका मज़ा लो यारो...
उर्मिला माधव....
10.3.2016
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