बाज़ार क्या
ग़ज़ल----
बख्श देगा हमको ये बाज़ार क्या??
हम बचा पायेंगे अब दस्तार क्या ??
बोलियाँ इज्ज़त की यूँ लगने लगीं,
साफ़ ज़ाहिर था के हैं आसार क्या ??
सोच कर हालात हम घबरा गए ,
हार जाएगा अबस किरदार क्या ??
लोग सब आ-आके ये पूछा किये,
ज़िंदगी से डर गए हो यार क्या ??
मौत की तारीकियां कहने लगीं,
वाक़ई तुम होगये बेज़ार क्या ??
उर्मिला माधव...
24.7.2014...
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