खलने लगी

मुझको अब खलने लगी,बज़्म-ए-अदब की तीरगी,
लाख़ ख़्वाहिश ही सही पर ज्यों की त्यों है तिश्नगी,

दिल को खुंदक ही हुई,माहौल घटिया देख कर,
शाइरी बस नाम है ....पर जा-ब-जा है दिल्लगी....
उर्मिला माधव...

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