ज़िक्र अंधेरी रात का
भीगे पत्ते, शाखें भीगी मौसम है बरसात का
चर्चा ऐसे मौसम में है, सिर्फ़ अंधेरी रात का,
ऐसे भीगे मौसम में है ज़िक्र अँधेरी रात का,
कभी हवा के झोंके खाकर,खिड़की घर की खुल जाए,
दिल की दुनियाँ हिल जाए और अपने आप संभल जाए,
खड़ी- खड़ी बस इतना सोचूँ क्या जाने अब क्या होगा,
बिजली चमके आसमान में,डर कर जान निकल जाए,
क्या करना है मुझको ऐसी बे-मतलब सौगात का,
ज़िक्र अँधेरी रात का,ये मौसम है बरसात का ?
उर्मिला माधव,
26.7.2016
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