चाहती हूँ
पुराने पन्नों से----
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बाँसुरी तुमको बनाना चाहती हूँ,
अपने होठों से लगाना चाहती हूँ,
और कोई गीत चाहे गा न पाऊँ,
सिर्फ तुमको गुनगुनाना चाहती हूँ,
स्वप्न जो भी मेरी आँखों ने सजाए,
वो मैं सब तुमको सुनाना चाहती हूँ,
मुझको इतनी दूरियाँ जँचती नहीं हैं,
तुमसे मिलने को बहाना चाहती हूँ।।...
#उर्मिलामाधव...
31.3.2015
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