होके दिखा
अभिषेक शुक्ला की ज़मीन पर.
मैं जहां हूँ ......तू वहां हो के दिखा,
एक शब भी ...चैन से सो के दिखा,
लोग ......दरिया के किनारे हो लिए
ख़ुश्क आंखों से कभी .रो के दिखा
एक जखीरा,ज़ख़्म का सीने पे रख,
और .लहू से ज़ख़्म को धोके दिखा...
उर्मिला माधव,
14.10.2017
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