ऊपर रखो
चार शेर..
पार करना है तुम्हें दरिया अगर,
पाँव अपने, आब से ऊपर रखो
मंज़िलों की दूरियां क्यों नापना,
ख़ुद को बस गिरदाब से ऊपर रखो,
नींद अपनी ख़्वाब में आ जाएगी,
आंख लेकिन ख़ाब से ऊपर रखो,
गुफ़्तगू अनहद से भी हो जायेगी,
उंगलियां मिज़राब से ऊपर रखो,
उर्मिला माधव
29.3.2018
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