आते रहना---फ्री वर्स
श्रद्धांजलि आदरणीय केदार नाथ सर को ...
आते रहना,
मैंने उसको जाते हुए कहा था,
लेकिन वो जा रहा था,
नहीं आने के क्रम में
आभास तक न होने दिया,
बस वो जा रहा था,
जाते हुए हाथ हिला रहा था,
बुद्धिमान दिखाई देते हुए,
समझा रहा था,हमें
हम मूर्ख हैं,
निरंतर विष पीते हैं,
कितनी आशाओं में जीते हैं,
यही खेल है करतार का,
जीत और हार का,
हार गए थे हम,जाने वाले से,
वो जो जाते हुए हाथ हिला रहा था,
कभी नहीं आने के लिए...
उर्मिला माधव
19.3.2018
Comments
Post a Comment