आज़ाद नज़्म-- कुत्ते की आवाज़

बहुत दूर कहीं
एक कुत्ते के कराहने की आवाज़,
बहुत वीराना सा लगता है,
दहशत सी लगती है,
सूखे पत्तों की आहट,
जैसे कोई अँधेरे में चलता हो,
ज़िन्दगियों का जायज़ा
लेने निकलता हो,
वहशत होती है,
जैसे कोई याद आता हो,
मेरा साथ कहाँ है?,
मेरा दूसरा हाथ कहाँ है,
ये क्या है?
अपनी भी ख़बर नहीं,
पर मुझे कोई डर नहीं,
जाती हूँ ऒर आती हूँ
दूसरा हाथ ले के,
कुत्ता तो ख़ामोश हो गया,
लगा जैसे उम्र भर को सो गया,
मुझे जाना होगा,
कुत्ते को क्या हुआ
हे माँ,पर तुम भी तो नहीं,
माँ,
बरसों हुए गए हुए,
लौटती क्यों नहीं माँ,
याद तो आती है
माँ ही नहीं आती,
कुत्ता भी वहीँ गया लगता है,
मुझे भी जाना है,
मैं थक गई हूँ
उर्मिला माधव
23.11.2016

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