नवाज़िश है
लोग कहते हैं.....भई,नवाजिश है,
ये भी तो एक तरह की साजिश है,
लफ्ज़ शीरीं जुबां.........शहद जैसी,
दिल के अन्दर अजब सी खारिश है,
जब कभी ये.....उफ़क भी रोता है,
हंस के कहते हैं लोग.....बारिश है,
मुझसे मिलना तो साफ़ दिल लेके,
मेरी हर इक से ये......गुजारिश है...
मेरी हर इक से ये......गुजारिश है..
उर्मिला माधव...
9.11.2013.
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