दहलीज़---फ्री वर्स
हम चेहरा नहीं,
एक मुखौटा हैं,
बचपन खोते हुए,
जवानी की दहलीज़
बदलते हुए मानदंड
यानि
एक बेटी,
ज़िन्दगी,
एक सौदा,
क्या लेंगे आप?
बेटी के इलावा ?
धन ? या हमारा सारा सुकून
संकोच न करें,
केवल कहें,
हम चैन खोने पर,
सहमत हैं,
धन देकर भी,
बस----
एक बार आपका द्वार,
कन्या का घरबार,
ध्यान रहे,
गैस सिलेंडर न फटे,
क्योंकि अब नया युग,
स्टोव का समय नहीं,
उर्मिला माधव
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