वृंदावन हो जाता है

जब याद तुम्हारी आती है तो घर सावन हो जाता है,
स्वर मुखर तुम्हारा होते ही मन वृन्दावन हो जाता है,

छवि मधुर तुम्हारी इतनी है,क्या जानूं कितनी है सीमा,
जब प्रेम सहित वंदन करलूं यह घर पावन हो जाता है...

बस गली-गली मैं घूम सकूँ,मुख चन्द्र तुम्हारा चूम सकूँ,
यह ह्रदय कल्पना करले तो,सब मन भावन हो जाता है,
उर्मिला माधव...
10.11.2014....

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