खदंग

हम ज़मीं खोद के देखेंगे,कहाँ पहुंचा खदंग,
उसने माहौल में .कुछ खाक़ उड़ा रख्खी है ....

एक मदारी जो बजाता है,डुगडुगी अपनी,
उसने तरक़ीब से बस भीड़ जुटा रख्खी है,
उर्मिला माधव...
24.11.2016

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