नज़्म--शक़्ल देखी

तुमने उसकी शक़्ल देखी,
जिसपे लिख्खा था वजूद?
कनखियों से देख कर भी,
.........देखता कोई न था,
दिल ही दिल में मुस्कुरा के,
उसने ये सोचा के शायद,
आलिमों की भीड़ में
.लिख्खा-पढ़ा कोई न था
उर्मिला माधव
21.11.2017

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