संगाती रे
जो भाषा तुझको है आती,मुझको नहीं वो आती रे,
पावन प्रीत सहज है मुझ में मेरी यही है थाती रे,
तेरे मन में पूरी दुनियां,मेरे मन में केवल तू ,
छल प्रपंच में रचा बसा तू,मेरा नहीं संगाती रे
उर्मिला माधव..
17.11.2016
जो भाषा तुझको है आती,मुझको नहीं वो आती रे,
पावन प्रीत सहज है मुझ में मेरी यही है थाती रे,
तेरे मन में पूरी दुनियां,मेरे मन में केवल तू ,
छल प्रपंच में रचा बसा तू,मेरा नहीं संगाती रे
उर्मिला माधव..
17.11.2016
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