हलचल

मेरे होने से मच गई हलचल,
जब मेरी आंख हो गई जलथल,

ज़ेह्न बस लौटने को कहता था,
एक ख़्वाहिश थी रुक गई उस पल,

मैं अकेली ऑ भीड़ ज़्यादा थी,
दिल में हर चंद हो गई खलबल,

इम्तेहां सब्र का हुआ ज़ाहिर,
राह ख़ुद चलके आ गई,बढ़चल,
उर्मिला माधव.

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