सफ़र होने दिया
अपने घर की सीढियां अच्छी लगीं,
और वहीँ तक हर सफ़र होने दिया...
बस, के दो राहें ..नहीं मंज़ूर थीं,
मील के पत्थर को सर होने दिया..
दिल को हिफ्ज़े आबरू अव्वल लगी,
बाद उसके . .....जो हुआ होने दिया...
उर्मिला माधव...
29.6.2015
अपने घर की सीढियां अच्छी लगीं,
और वहीँ तक हर सफ़र होने दिया...
बस, के दो राहें ..नहीं मंज़ूर थीं,
मील के पत्थर को सर होने दिया..
दिल को हिफ्ज़े आबरू अव्वल लगी,
बाद उसके . .....जो हुआ होने दिया...
उर्मिला माधव...
29.6.2015
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