क्या कीजिये

दिल बहुत दुःख जाय तो क्या कीजिए,
सर ब सजदा हो के रोया कीजिए

जम के पत्थर हो गए हैं जिस्म-ओ-जां,
उस पै पत्थर आप फेंका कीजिए,
उर्मिला माधव

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