सुनसान है
कोई भी ग़ुज़रा नहीं रहगुज़र सुनसान है,
वास्ते मेरे मगर हर ज़र्रे में तूफ़ान है,
क्या कहूँ कि दम मेरा घुटने लगा अब,
रंज मेरा देख कर वाद-ए-सवा हलकान है,
चीखती रहती है मेरी आह मेरी रूह में,
है अभी बाकी कहानी ये महज उन्वान है
एक पत्थर तोड़कर दिल होगया है अब ख़ुदा,
मेरा दिल ग़ाफ़िल रहा कि वो बहुत इंसान है,
उसने तोहफ़े में दिए जो आहो नाले रंजो,ग़म,
मेरे घर में आजतक अब तक वही सामान है....
----------उर्मिला माधव------------
30.6.2013
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