सांस तक
एक मतला तीन शेर---
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आज ये ज़ाहिर हुआ है यक-ब-यक,
साथ भी देगी नहीं......ये सांस तक,
राब्ते अब तक रहे........जो राह से,
क्या चलेंगे....आख़री एहसास तक ??
कोई भी यक़ता नहीं....इस खेल में,
हो गए ख़ामोश..ख़ासम ख़ास तक.....
उर्मिला माधव...
17.6.2016..
यकता---अद्वितीय
राबता---सम्बन्ध
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