तीरगी में चल रहे थे
तीरगी में चल रहे थे रौशनी बस दिल की थी
आँधियों का सामना था,इक ख़ुशी मंज़िल की थी
जब के मेरे दिल के टुकड़े चार सू बिखरे रहे,
लोग ये कहते रहे ये चाल किस आदिल की थी
उर्मिला माधव...
31.3.2014...
तीरगी में चल रहे थे रौशनी बस दिल की थी
आँधियों का सामना था,इक ख़ुशी मंज़िल की थी
जब के मेरे दिल के टुकड़े चार सू बिखरे रहे,
लोग ये कहते रहे ये चाल किस आदिल की थी
उर्मिला माधव...
31.3.2014...
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