कितनी रखती है गुंजाइश
हिलती नहीं धसक जाती है,कितनी रखती है गुंजाइश,
रहे सलामत ज़मीं जहां में,यही है बस रब से फरमाइश,
रहे सलामत ज़मीं जहां में,यही है बस रब से फरमाइश,
कहीं कोई जागीर बसाये,.....कोई सियासी रंग जमाये,
हर दिन मकीं लड़ा करते हैं,जगह-जगह करते पैमाइश,
हर दिन मकीं लड़ा करते हैं,जगह-जगह करते पैमाइश,
गिनती जिनको याद न होगी,आज़ादी के परवानों की,
वही ठसक से गिनवा देंगे,अपनी पुश्तों की पैदाइश,
वही ठसक से गिनवा देंगे,अपनी पुश्तों की पैदाइश,
मुर्दा दिल क्या ख़ाक लड़ेंगे,वतन परस्ती के जज़्बे से,
वतन के शाहिद परवानों की याद नहीं,जिनको आराइश,
वतन के शाहिद परवानों की याद नहीं,जिनको आराइश,
हिन्द के बच्चे आशुफ़्ता हैं,दुनियांदारी बोझ है इनको,
कौन मुहैय्या करवाएगा,इनके दिल को भी आसाइश्...
उर्मिला माधव
15.8.2017
कौन मुहैय्या करवाएगा,इनके दिल को भी आसाइश्...
उर्मिला माधव
15.8.2017
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