बे परवाहियां
दिल ने लीं अब ओढ़ बे-परवाहियाँ,
रूठ जाए रब .....या रूठे माहियां,
रूठ जाए रब .....या रूठे माहियां,
वक़्त वो कुछ और था सुनिये ज़रा
जब डराती थीं हमें ......तन्हाईयाँ,
जब डराती थीं हमें ......तन्हाईयाँ,
ख़ुद अकेले ....माद्दा रखते हैं हम,
क्या बिगाडेंगी ये अब रुसवाइयां,
क्या बिगाडेंगी ये अब रुसवाइयां,
देख पाए जो न एक बारात तक,
वो बजायें आजकल शहनाईयां,
वो बजायें आजकल शहनाईयां,
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