किस तसल्ली की दुआ करते हो तुम,
ज़ख्म ही तो बस छुआ करते हो तुम,
ख़ैर ख्वाहों में तो ....हरगिज़ हो नहीं,
हो रहो ..जो कुछ हुआ करते हो तुम,
इसको रब ने कीमती कर के दिया,
ज़िन्दगी को बस जुआ करते हो तुम..
उसकी चाहत क्यूँ तुम्हें दरकार है,
जिसके हक़ में,बद्दुआ करते हो तुम...
जो भी दिल को दे सके हो आज तक,
आबलों को मजमुआ करते हो तुम,
उर्मिला माधव,
26.6.2017
ज़ख्म ही तो बस छुआ करते हो तुम,
ख़ैर ख्वाहों में तो ....हरगिज़ हो नहीं,
हो रहो ..जो कुछ हुआ करते हो तुम,
इसको रब ने कीमती कर के दिया,
ज़िन्दगी को बस जुआ करते हो तुम..
उसकी चाहत क्यूँ तुम्हें दरकार है,
जिसके हक़ में,बद्दुआ करते हो तुम...
जो भी दिल को दे सके हो आज तक,
आबलों को मजमुआ करते हो तुम,
उर्मिला माधव,
26.6.2017
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