कितना जुदा लगा था,
मेरा पड़ोसी लड़का,
बातों में था सलीका,
वो जाने,किससे सीखा,
मिलने में दम नहीं था,
पर फिर भी कम नहीं था,
हर रंग जानता था,
अपनी ही मानता था,
राहों में आते जाते,
उसको कभी न देखा,
एक बार देखने पर,
वो याद रह गया था,
लेकिन बिना मिले भी,
हर बात कह गया था,
और एक दिन अचानक,
वो मुझसे,खो गया था,
मेरा पड़ोसी लड़का,
परदेसी हो गया था,
राहें वहीं खड़ी थीं,
उसके क़दम नहीं थे,
मेरा पड़ोसी लड़का,
कैसा है,अब कहाँ है
ये सोचती थी पहले,
अब सोचती नहीं हूँ,
एहसास हो गया है
मैं तनहा सोचती हूँ
पर बे वफ़ा नहीं था,
मेरा पड़ोसी लड़का
कुछ बोलता नहीं है,
अपने ख़याल हरगिज़
जो खोलता नहीं है,
अब इतना जानती हूं,
मेरा पड़ोसी लड़का,
केवल पड़ोसी था वो..
उर्मिला माधव,
25.6.2017
मेरा पड़ोसी लड़का,
बातों में था सलीका,
वो जाने,किससे सीखा,
मिलने में दम नहीं था,
पर फिर भी कम नहीं था,
हर रंग जानता था,
अपनी ही मानता था,
राहों में आते जाते,
उसको कभी न देखा,
एक बार देखने पर,
वो याद रह गया था,
लेकिन बिना मिले भी,
हर बात कह गया था,
और एक दिन अचानक,
वो मुझसे,खो गया था,
मेरा पड़ोसी लड़का,
परदेसी हो गया था,
राहें वहीं खड़ी थीं,
उसके क़दम नहीं थे,
मेरा पड़ोसी लड़का,
कैसा है,अब कहाँ है
ये सोचती थी पहले,
अब सोचती नहीं हूँ,
एहसास हो गया है
मैं तनहा सोचती हूँ
पर बे वफ़ा नहीं था,
मेरा पड़ोसी लड़का
कुछ बोलता नहीं है,
अपने ख़याल हरगिज़
जो खोलता नहीं है,
अब इतना जानती हूं,
मेरा पड़ोसी लड़का,
केवल पड़ोसी था वो..
उर्मिला माधव,
25.6.2017
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