अफ़साना
Jul 17, 2017 9:07am श्रद्धा नाइक एक आला अफ़साना निगार थीं, और बहुत आला दर्ज़े में शुमार होती थीं, 6 दहाइयाँ पार कर चुकी थीं। देखने में बेहद ख़ूबसूरत थीं..लेकिन उनका अपनी खूबसूरती से कोई लेना-देना नहीं था, सिर्फ़ लिखती रहती थीं,ख़ुद से बातें करना उनको बहुत अच्छा लगता था,अक्सर लोग उनसे मुलाक़ात करने आया करते थे,जहां तक हो सकता था,हर छोटे-बड़े , सबकी इज़्ज़त करती थीं,सभी नौजवान लड़के-लड़कियां और ज़ियादहतर,ख़वातीन ओ हज़रात सभी उनसे मु तास्सिर होते थे, एक रोज़ वो यकायक बहुत अचकचा गईं जब एक ख़त उनके पास आया जिसमें कुछ गुलाब की सूखी पत्तियां भी थीं और इत्र की खुशबू में रचा बसा ख़त देखने में भी बहुत ख़ूबसूरत था उनको ख़त खोलने की बहुत जल्दी हुई ख़ैर ख़त खोला गया,ख़त में जो लिखा था वैसी उम्मीद वो नहीं रखती थीं। क्यूंकि वो उस ज़बान को नही पढ़ सकती थीं। श्रद्धा जी ने भेजने वाले के ठिकाने पर ख़याल ही नहीं किया था, वो ख़त आसाम से भेजा गया था जिसे पढ़ना उनके लिए मुमकिन नहीं था वो असमियां ज़बान में लिखा गया था ,लिखने वाला एक नौजवान था जिसने साथ में अपनी एक तस्वीर भी भेजी थी वो समझ नहीं सकीं के वो सब क्या था और क्यों था !...