है चर्चा उस मस्ताने का,जो अनजाने में दौड़ गया,
एक दश्त-ओ-जुनूं का दीवाना,लो वीराने में दौड़ गया,

क्या मानी उसको वहशत से,अनजान रहा जो दहशत से,
वीरानी-ए-दिल जब हावी हुआ तो मैख़ाने में दौड़ गया,
उर्मिला माधव,
2.4.2017

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