दिल मेरा लग नही रहा हरगिज़,
कोई दिल पर मिरे हुआ क़ाबिज़,
ख़ुद ही ख़ुद को मनाती रहती हूं,
भीग जाते हैं हर दफ़ा आरिज़,
नज़्र अंदाज़ लाख़ करती रहूँ,
दिल मुझे रोज़ कर रहा आजिज़
उर्मिला माधव,
1.4.2017
कोई दिल पर मिरे हुआ क़ाबिज़,
ख़ुद ही ख़ुद को मनाती रहती हूं,
भीग जाते हैं हर दफ़ा आरिज़,
नज़्र अंदाज़ लाख़ करती रहूँ,
दिल मुझे रोज़ कर रहा आजिज़
उर्मिला माधव,
1.4.2017
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