कभी कभी ऐसा ख्याल भी...

ज़ुल्फ़ कांधों पै बिखराइये,
बाद उसके इधर आइये ,

मुझसे कहने लगे दीदावर,
चांदनी रुख पै ठहराइए,

मुझको कहना पड़ा देखिये,
मेरे रस्ते से हट जाइए,

मेरी फ़ितरत ज़रा फ़र्क है,
ऐसा हरगिज़ न फरमाइए,

फ़ासले मुझको दरक़ार हैं,
चलते-फिरते नज़र आइये उ
र्मिला माधव...
22.9.2014.....

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