स्थित प्रज्ञ जीवन,
स्थिर विचार,
ज़रा भर को हिलते हैं,
पर-----
जिन दरख़्तों की जड़ें गहरी रही हैं,
आँधियों के बाद भी ठहरी रही हैं...
मैं दरख़्त हूँ,ठहरी हुई सदैव के लिए...
उर्मिला माधव,
24.7.2016
स्थिर विचार,
ज़रा भर को हिलते हैं,
पर-----
जिन दरख़्तों की जड़ें गहरी रही हैं,
आँधियों के बाद भी ठहरी रही हैं...
मैं दरख़्त हूँ,ठहरी हुई सदैव के लिए...
उर्मिला माधव,
24.7.2016
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