अच्छा बताओ मैंने कभी तुमसे कुछ कहा ?
जो भी कहा वो तुम ने कहा मैंने बस सहा,
मैं उम्र भर रही हूँ इन्हीं रंज-ओ-ग़म के साथ,
सैलाब दुश्मनों का ......मेरे संग ही संग रहा,
खुशियाँ तुम्हें मिलीं तो रहे दुश्मनों के पास,
दरिया-ए-अश्क़ जब भी बहा ..मेरे घर बहा,
मैं तो वफ़ा की राह में बिलकुल ज़हीन हूँ,
तुम ही ने किये नज्र मुझे ......दर्द बारहा ...
जैसी भी जो भी हूँ मैं मगर मोतबर तो हूँ,
हर एक की तरफ से फ़क़त ज़ुल्म भर ढहा....
उर्मिला माधव....
30.7.2016
जो भी कहा वो तुम ने कहा मैंने बस सहा,
मैं उम्र भर रही हूँ इन्हीं रंज-ओ-ग़म के साथ,
सैलाब दुश्मनों का ......मेरे संग ही संग रहा,
खुशियाँ तुम्हें मिलीं तो रहे दुश्मनों के पास,
दरिया-ए-अश्क़ जब भी बहा ..मेरे घर बहा,
मैं तो वफ़ा की राह में बिलकुल ज़हीन हूँ,
तुम ही ने किये नज्र मुझे ......दर्द बारहा ...
जैसी भी जो भी हूँ मैं मगर मोतबर तो हूँ,
हर एक की तरफ से फ़क़त ज़ुल्म भर ढहा....
उर्मिला माधव....
30.7.2016
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