न जाने क्या है वो अहसास सा इस जिस्म में,है भी,नहीं भी है,
न जाने क्या है कुछ हस्सास सा इस जिस्म में,है भी,नहीं भी है,
बड़े ही फ़ख़्र से करते हैं इस्तेमाल ये कह कर हमारा है,
न जाने क्या है जो है ख़ास सा इस जिस्म में,है भी नहीं भी है,
कभी मुर्दार सा होकर पड़ा रहता है कोताही की हालत में,
न जाने क्या है एक इतिहास सा इस जिस्म में,है भी नहीं भी है,
उर्मिला माधव...
27.7.2016
न जाने क्या है कुछ हस्सास सा इस जिस्म में,है भी,नहीं भी है,
बड़े ही फ़ख़्र से करते हैं इस्तेमाल ये कह कर हमारा है,
न जाने क्या है जो है ख़ास सा इस जिस्म में,है भी नहीं भी है,
कभी मुर्दार सा होकर पड़ा रहता है कोताही की हालत में,
न जाने क्या है एक इतिहास सा इस जिस्म में,है भी नहीं भी है,
उर्मिला माधव...
27.7.2016
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