आज वो झुंझला रहे हैं,भर रहे हैं आह जी,
जो हमारे दर्द-ए-ग़म पर,कर रहे हैं वाह जी,
अब हमें वहशत नहीं होती तो बोलो क्या करें,
हमको हैरत है के वो क्यों कर रहे हैं चाह जी,
हमने जो आंसू पिए हैं,उसका आधा तो पियें
वरना खुद क्यूँ दूरियों की कर रहे हैं राह जी,
उर्मिला माधव,
9.7.2016
जो हमारे दर्द-ए-ग़म पर,कर रहे हैं वाह जी,
अब हमें वहशत नहीं होती तो बोलो क्या करें,
हमको हैरत है के वो क्यों कर रहे हैं चाह जी,
हमने जो आंसू पिए हैं,उसका आधा तो पियें
वरना खुद क्यूँ दूरियों की कर रहे हैं राह जी,
उर्मिला माधव,
9.7.2016
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