नादान सा पंछी --- नज़्म

चला जाता था अपनी राह पर नादान सा पंछी,
शिकारी झुण्ड में आकर,निशाने साध कर बोले,
बहुत तुम ख़ूब सूरत हो,तुम्हें ज़िंदा न छोड़ेंगे,
के ये परवाज़ रोकेंगे,तुम्हारे पंख तोड़ेंगे,
अगर तुम खूबसूरत हो तो ये इलज़ाम तुम पर है,
कभी ये आँख मुड़ती है,कभी हम खुद भी मुड़ते हैं,
बिना सोचे, बिना समझे तुम्हें बढ़कर पकड़ते हैं,
तुम्हारी खूबियों पर रोज़ एक इलज़ाम जड़ते हैं,
ग़लत तुम हो नहीं लेकिन,तुम्हीं से हम झगड़ते हैं
वो जो एक ख़ास ख़ामी है,हमारी आँख की ही है,
बख़ुद हम ही हैं,बदनीयत,मगर फिर भी अकड़ते हैं
...😊
उर्मिला माधव...
6.4.2016

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