ये तो बस अपनी पर्दा दारी है,
तुमने क्या बात कब सँवारी है?

हाल गैरों से मेरा पूछा किए,
वाह क्या ख़ूब ग़मग़ुसारी है !

तल्ख़ लहज़े से बात करना ही,
क्या मुहब्बत की आबशारी है?


ऐसे शिकवे से कुछ नहीं मानी,
जिसमें यकतरफ़ा बात जारी है,


तुमको ख़ामोशिय़ाँ मुबारक़ हों,
मुझको बस मेरी बेक़रारी है।...

Urmila Madhav
22.4.2013

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