तेरा साथ उल्फ़त की शबनम रहेगा,
बशर्ते के ता-उम्र बाहम रहेगा,

ख़ुसूसी मुहब्बत मिली ज़िन्दगी को,
तो यूँ मौत का फिर किसे ग़म रहेगा

तजुर्बों ने जो कुछ सिखाया है हमको,
वो हो चाहे जितना, मगर कम रहेगा,

जुबां से उन्हें आफ़रीं हम कहेंगे,
जहाँ तक भी इस जिस्म में दम रहेगा,

नहीं फ़िक़्र हमको ज़माने की हरगिज़,
ज़माना हमेशा ही बरहम रहेगा,

दिल-ओ-जां है क़ुर्बान जिस पे हमेशा,
वो हमदम है और सिर्फ़ हमदम रहेगा,
उर्मिला माधव ...
7.4.2016

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