जो उसे करना था उसने कर लिया,
मैंने बस इलज़ाम अपने सर लिया,
मैंने बस इलज़ाम अपने सर लिया,
फासले दिल में मुक़म्मल हो गए,
और दामन इक धुंए से भर लिया,
मुतमईन कोई हो गया उससे बहुत,
मैंने हिस्से में महज़ एक डर लिया,
सोचती रहती हूँ ......अब तन्हाई में,
इस क़दर क्यों फैसला बदतर लिया,
गुफ्तगू का वक़्त भी आया बहुत,
मैंने मौजू,जान कर, दीगर लिया...
खुश रहा वो भी मुझे कम आंक कर,
दिल मेंरा उसपे फ़क़त हंस भर लिया...
#उर्मिलामाधव..
18.10.2015
और दामन इक धुंए से भर लिया,
मुतमईन कोई हो गया उससे बहुत,
मैंने हिस्से में महज़ एक डर लिया,
सोचती रहती हूँ ......अब तन्हाई में,
इस क़दर क्यों फैसला बदतर लिया,
गुफ्तगू का वक़्त भी आया बहुत,
मैंने मौजू,जान कर, दीगर लिया...
खुश रहा वो भी मुझे कम आंक कर,
दिल मेंरा उसपे फ़क़त हंस भर लिया...
#उर्मिलामाधव..
18.10.2015
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