इन फरेबों की ..........क्या ज़रूरत थी,
जो तुम्हें करना था यूँ ही कर लिया होता
‪#‎उर्मिलामाधव‬
16.10.2015

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge