अब मेरा सूटकेस ख़ाली है,
तेरी हर याद जो हटाली है,
वो जो चिठ्ठी थी इसके खीसे में,
इस बरस होली में जला ली है,
तेरी हर याद जो हटाली है,
वो जो चिठ्ठी थी इसके खीसे में,
इस बरस होली में जला ली है,
मुझको भाता नहीं है रंग-ए-गुलाल,
इसलिए खाक़ बस उड़ा ली है,
बेवफ़ा तुझको क्यूँ कहे कोई,
ख़ुद ये तोहमत मैंने लगा ली है,
दिल के कोने में एक बेढब सी,
अपनी दुनियां अलग बसा ली है,
#उर्मिलामाधव...
इसलिए खाक़ बस उड़ा ली है,
बेवफ़ा तुझको क्यूँ कहे कोई,
ख़ुद ये तोहमत मैंने लगा ली है,
दिल के कोने में एक बेढब सी,
अपनी दुनियां अलग बसा ली है,
#उर्मिलामाधव...
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