एक मतला दो शेर ----
ये जो लावा सा बह निकलता है,
पहले सीने में ख़ूब जलता है,
ये जो लावा सा बह निकलता है,
पहले सीने में ख़ूब जलता है,
ये भी है कारसाज़ी,बस दिल की,
वर्ना शोलों पै कौन चलता है ?
ऐसा एक दर्द ही है जो हरदम,
वक़्त के साथ रुख़ बदलता है।।....
#उर्मिलामाधव.
7.9.2015
वर्ना शोलों पै कौन चलता है ?
ऐसा एक दर्द ही है जो हरदम,
वक़्त के साथ रुख़ बदलता है।।....
#उर्मिलामाधव.
7.9.2015
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