तुम जीत भी जाओ तो उसे.....हार समझना,
बे-मौक़ा वाह-वाह को.........बेकार समझना,
शेर-ओ-सुखन के हुस्न को जीता न कोई भी,
तारीफ़ की आवाज़ों को...बस प्यार समझना,
‪#‎उर्मिलामाधव‬
8.9.2015

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