दिल में कोई बात है और तुम नहीं,
आओ देखो रात है और तुम नहीं, दूर मंदिर में .....ये बजती घंटियां, दिल में होतीं हैं अजब सरगोशियाँ, दिल धड़कता है न जाने किसलिए, याद आती हैं ....तुम्हारी शोखियां, दर्द की इफरात है और तुम नही, आओ देखो रात है और तुम नहीं, तीरगी सी छा गई घर भर में अब, लो मैं सोने आ गई बिस्तर में अब, हर कोई सो जायेगा जब नींद में, सो नहीं पाउंगी हरगिज़ पर मैं अब, तारों की बारात है ओर तुम नहीं आओ देखो रात है और तुम नहीं, वो तुम्हारा मुस्कुराना ......होठ से, सर झुकाके देखना ..एक ओट से, दिल तुम्हारा किस क़दर मासूम है, टूट जाना ....एक ज़रा सी चोट से, प्यार की सौगात है ओर तुम नहीं, आओ देखो रात है ओर तुम नहीं, जुल्म करते हैं ये अब हालात भी, दूर हो और कर न पाऊँ बात भी, दिल डराती हैं उफ़क़ पे बिजलियाँ, उस पै तन्हाई .......अँधेरी रात भी बे-अदब बरसात है और तुम नहीं, आओ देखो रात है और तुम नहीं..
#उर्मिलामाधव...
25.7.2015
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दास्तां कह रही हैं
हवाएं अजब दास्तां कह रही हैं, कहाँ से चली हैं, कहाँ बह रही हैं
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